पितृ महाआरती एवं दीप समर्पण समारोह (गया जी, बिहार)
एक शाम, अपने-अपने पितरों के नाम
🪔 जब माधव ने स्वयं किया पितरों का तर्पण
एक बार महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद, धर्मराज युधिष्ठिर के मन में अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों की मुक्ति को लेकर गहरी चिंता हुई।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण (माधव) से पूछा— "हे माधव! महाभारत के इस भीषण युद्ध में जो लाखों लोग मारे गए, उन्हें सद्गति कैसे मिलेगी?"
भगवान माधव मंद-मंद मुस्कुराए और बोले— "हे कुंतीपुत्र! तुम शोक मत करो। अधिक मास आने वाला है। तुम इस पावन महीने में मेरे निमित्त दीपदान करो और अपने पितरों के नाम से अन्न-जल का संकल्प मुझे अर्पित कर दो।"
युधिष्ठिर ने ऐसा ही किया। अधिक मास की समाप्ति पर भगवान माधव ने स्वयं अपनी दिव्य दृष्टि से युधिष्ठिर को दिखाया कि उनके पूर्वज और युद्ध में मारे गए सभी वीर, माधव की कृपा से साक्षात बैकुंठ धाम को प्रस्थान कर रहे हैं।
कथा की सीख: यह पौराणिक कथा हमें सिखाती है कि अधिक मास में माधव को साक्षी मानकर किया गया छोटा सा प्रयास भी पूर्वजों की आत्मा को परम शांति देता है।
✍️ आचार्य वाणी (संस्थापक, KMC Cosmic Foundation)
"सृष्टि के रचयिता को जानने का मार्ग हमारे पूर्वजों से होकर ही गुजरता है। हमारे पितृ केवल अतीत नहीं, बल्कि हमारी जीवन-शक्ति के आधार हैं। गया जी की इस पावन धरा पर 'एक शाम, अपने-अपने पितरों के नाम' केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक प्रयास है। जब हम कृतज्ञता के दीप जलाते हैं, तो वह प्रकाश केवल घाट को ही नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के संस्कारों को भी आलोकित करता है।"
📅 कार्यक्रम का समय (समय सारिणी)
| प्रातः 05:00 बजे से | मंगलाचरण एवं पितृ स्मरण |
| प्रातः 06:30 बजे से | पिंडदान एवं तर्पण (इच्छानुसार) |
| प्रातः 09:00 बजे से | भजन एवं आध्यात्मिक सत्र |
| दोपहर 12:30 बजे | भोजन सेवा एवं प्रसाद वितरण (अन्नदान) |
| दोपहर 02:00 बजे से | सनातन संस्कृति एवं पितृ सम्मान पर विशेष संवाद |
| सायं 05:30 बजे से | भजन संध्या |
| सूर्यास्त समय (लगभग 06:35 PM) | भव्य पितृ महाआरती एवं दीप समर्पण |
*नोट: समय स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार परिवर्तनीय हो सकता है।
✨ कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ
🙏 सेवा का एक दीप - पितरों के नाम (सहयोग करें - पुण्य का भागी बनें)
आइए... अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करें, एक दीप उनके नाम जलाएं, जरूरतमंदों को भोजन कराएं और सनातन संस्कृति की इस दिव्य परंपरा का हिस्सा बनें। आप नीचे दिए गए माध्यमों से इस पुनीत कार्य में सहयोग कर सकते हैं:
- 🍛 भोजन सेवा (अन्नदान) में सहयोग
- 🪔 पितृ महाआरती एवं दीपदान में सहयोग
- 🎪 आयोजन एवं व्यवस्था सहयोग
- 💐 सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि
UPI ID: 311067211473070@cnrb
Accepted via: PhonePe | Google Pay | Paytm | BHIM UPI
स्कैन करें एवं सहयोग/दान करें
