माधव” आध्यात्मिक एवं साहित्यिक पत्रिका विशेषांक — २०२३

प्रथम स्थापना संस्करण वर्ष 2023 | अनावरण – अक्षय तृतीया 2023

कृष्णा मधुसूदन कॉस्मिक फॉउंडेशन

अध्यात्मिक एवं साहित्यिक मंच की विशेष प्रस्तुति — “माधव”

कृष्णा मधुसूदन कॉस्मिक फॉउंडेशन माधव पुस्तक कवर
सद्ग्रंथ ध्येय वाक्य:

“निष्ठा धृतिः सत्यम्”

🙏 श्रद्धासुमन: पूज्यपाद चरणों में कोटि-कोटि समर्पण

पूज्यपाद दादा गुरु पिता जी माता जी श्री अग्रज समर्पण
📸 पुस्तक के ‘समर्पण’ पृष्ठ से साभार (पेज २)

यह आध्यात्मिक एवं साहित्यिक प्रयास हमारे पूज्य पूर्वजों, मार्गदर्शकों और गुरुसत्ता की दिव्य चेतना को सादर समर्पित है, जिनका आशीर्वाद हमारे हर सेवा कार्य का आधार है:

पूज्यपाद दादा गुरु: आध्यात्मिक मार्गदर्शक और कुल के परम प्रकाश पुंज।
पूज्यपाद पिता जी: संस्कार प्रदाता और धर्मनिष्ठ जीवन के आदर्श प्रेरणास्रोत।
पूज्यपाद माता जी: करुणा, वात्सल्य और सनातन संस्कारों की साक्षात प्रतिमूर्ति।
पूज्यपाद श्री अग्रज: मार्गदर्शक, रक्षक और ज्येष्ठ भ्राता का अनुपम संबल।


🔥 मैं यज्ञ क्यों करूं?

जानिए सनातन धर्म और आधुनिक विज्ञान के अनुसार दैनिक जीवन में यज्ञ अनुष्ठान की अनिवार्य आवश्यकता के 10 अकाट्य कारण:

1

मर्यादा पुरुषोत्तम की परंपरा: क्योंकि मेरे आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम नित्य प्रति स्वयं यज्ञ करते थे।

2

योगेश्वर श्रीकृष्ण का आदर्श: क्योंकि मेरे आराध्य योगीराज श्री कृष्ण महाराज प्रतिदिन नियमपूर्वक यज्ञ करते थे।

3

ऋषि-महर्षियों की पद्धति: क्योंकि हमारे महान ऋषि-महर्षि अपने जीवन के प्रत्येक शुभ कार्य को प्रारंभ करने से पूर्व अनिवार्य रूप से यज्ञ करते हैं।

4

विज्ञान द्वारा प्रमाणित: क्योंकि यह आधुनिक विज्ञान में भी पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि यज्ञ एक अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो वातावरण को शुद्ध करती है।

5

रोगाणुओं का नाश: क्योंकि यज्ञ की दिव्य ऊर्जा और औषधीय धूम्र वायुमंडल में मौजूद हानिकारक वायरस व कीटाणुओं का शमन करने में पूरी तरह सक्षम है।

6

सर्वोच्च धर्मग्रंथों में महिमा: क्योंकि मनुस्मृति, दर्शन शास्त्र, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण व महाभारत आदि सभी प्रमुख सनातन ग्रंथों में इसकी महिमा का परम गुणगान किया गया है।

7

श्रेष्ठतम कर्म: क्योंकि हमारे पावन शास्त्रों में यज्ञ को “यज्ञो वै श्रेष्ठतमम् कर्म” कहा है।

8

आदि ग्रंथों की अनिवार्य आज्ञा: क्योंकि आदि ग्रंथों में प्रत्येक मनुष्य को यज्ञ करना अनिवार्य बताया है।

9

पर्यावरण का शोधन: क्योंकि यज्ञ करने से पर्यावरण शुद्ध होता है, जिसको हम लोग प्रतिदिन प्रदूषित करते हैं।

10

सर्वकल्याणकारी पूजा: क्योंकि यज्ञ वह पूजा है जिसका लाभ संसार में रहने वाले हर प्राणी को मिलता है।


📰 समाचार पत्रों की सुर्खियों में के.एम. कॉस्मिक फाउंडेशन

नीचे दी गई रिपोर्ट्स और पेपर कटिंग्स (समाचार पत्रों की कतरन) पटना के गर्दनीबाग (कच्ची तालाब) में आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और ऐतिहासिक महाआरती की वास्तविक झलकियाँ प्रस्तुत करती हैं:

गर्दनीबाग पटना स्वास्थ्य शिविर एवं गंगा आरती समाचार पत्र कतरन हिन्दुस्तान नई सोच एक्सप्रेस
📋 वास्तविक समाचार पत्र कतरन एवं प्रमोट रिपोर्ट (पेज ४)
निशुल्क मेगा शिविर

पटना के गर्दनीबाग में भव्य स्वास्थ्य शिविर का हुआ आयोजन

📌 रिपोर्ट: नई सोच एक्सप्रेस (पटना)

गर्दनीबाग स्थित कच्ची तालाब परिसर में केएम कॉस्मिक फाउंडेशन के सौजन्य से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इसमें एलोपैथी, आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के द्वारा 250 लोगों का सफल इलाज किया गया। आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद रोगियों को उनके घर के पास ही विशेषज्ञ चिकित्सा मिले, यही संस्था का मुख्य उद्देश्य था।

संस्था के प्रमुख नेचुरोथेरेपी विशेषज्ञ आचार्य नवीन पाठक ने प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को मानव के लिए श्रेष्ठ बताया। इस महा-शिविर में डाइटिशियन अभिलाषा रानी, डॉ. पंकज, डायटिशियन जागृत्ति सिन्हा, संतोष कुमार, प्रवीण कुमार, विशाल कुमार, राजन भारती, अनिल कुमार सिन्हा एवं मधुसूदन पाठक आदि विशेषज्ञों ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया।

ऐतिहासिक आयोजन

कच्ची तालाब पर पहली बार आयोजित हुई महाआरती

📌 रिपोर्ट: हिन्दुस्तान समाचार पत्र (पटना)

गर्दनीबाग स्थित कच्ची तालाब पर पहली बार भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इसके लिए विशेष रूप से बनारस एवं दरभंगा की प्रसिद्ध गंगा आरती मंडली को आमंत्रित किया गया था। रविवार की शाम को यह अलौकिक आरती निरंतर तीन घंटे तक चलती रही।

फाउंडेशन के संस्थापक आचार्य नवीन रंजन पाठक, मधुसूदन पाठक और ज्योति की उपस्थिति में माँ गंगा का पूजन किया गया। आरती के पावन समय पर पूरा घाट 2100 दीपों की दिव्य ज्योति से जगमगा उठा। अंत में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं के बीच खीर, पूरी और बुनिया का महाप्रसाद आदरपूर्वक बांटा गया।

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